दूध में खटाइ डालने पर वह जम क्यों जाता है।

दूध में खटाइ डालने पर वह जम क्यों जाता है। 

 आपको बता दे कि  दूध में खटाइ डालने पर वह जमता नहीं बल्कि फट जाता है। दूध का फटना और जमना दो अलग अलग क्रियाएँ है। ऊपर से देखने पर ये सायद एक जैसे ही लगे पर उनमे अंतर होता है। जब हम दूध में निम्बू का रास या अन्य कोई खट्टी चीज डालते है ,तो दूध फट जाता है और छैना बन जाता है। फटने से दूध में उपस्थित पानी अलग हो जाता है। बचे हुए हिस्से को छैना ( पनीर ) कहा जाता हैं। ,लेकिन जब दूध में जामवन (दही की थोड़ी सी मात्रा )डाला जाता है तो दूध जम  जाता है।
dahi panir

ये दोनों ही क्रियांए वास्तव में वैक्टीरिआ के कारन होती है सायद आप जानते ही होंगे की वैक्टीरिया या जीवाणु एक कोशिकीय जीव है। ये आकर में इतने छोटे होते है कि इनको आप आँखों से नहीं देख सकते है। बल्कि ये बीच की तरह अनगिनत अपार पैदा करते है। ये स्पोर प्रतिकूल परिस्थितियों में कई सालो तक ऐसे ही पड़े रहते है। अनुकूल परिस्थितियों में इनसे नए जीवाणु बनते है। 
जब हम दूध में खटाई डालते है तो एक तरह से दूध में मौजूद एक खास किस्म के जीवाणु के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करते हैं। यह जीवाणु सक्रीय होकर दूध से पानी को अलग कर देते है। और दूध को रासायनिक एवं परमाणविक रचना को बदल कर एक नया रूप दे देते है इस नए रूप को हम छैना या पनीर कहते है। छैने में दूध की साडी वस् और दूध के मुख्य प्रोटीन रहते है। अलग हुए पानी में भी कुछ प्रोटीन सक्कर और घुलनशील लवण होते है। दूध का जमना भी एक ऐसे परक्रियां है। 

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