कुत्ते रात में अधिक भौकते है क्यों ?| कुत्ता ही जीभ से पानी क्यों पिता ही ? घोडा गाय जैसे जानवर क्यों नहीं पीते

साइंस ज्ञान 

कुत्ते रात में अधिक भौकते है क्यों ?| 


कुत्ता एक वफादार जानवर होता है। इसके सूंघने की सकती इतनी अधिक होती है की यह 2 लाख गुना हलकी गंध को भी पहचान सकता है। यह किसी भी इंसान की आहत और उसकी गंध को अपने दिमाग में सुसक्षित कर लेता है। इस गंध को दोबारा सूंघने पर उस प्राणी का प्रतिबिंब उसके दिमाग में सुरक्षित हो जाता है। 
किसी भी इंसान की पसीने की गंध या उसके बोलने का यदि रात के सन्नाटे में महसूस किया जाये तो वातावरण शांत होने के कारन वह जल्दिओ से मस्तिष्क तंत्रिका को प्रभाबित करता है। यही गंध या बोलने की ध्वनि दिन के शोरगुल में कुत्ता काम महसूस कर पता है। दरअसल दिन में सूर्य के प्रकाश के कारन वातावरण में गर्मी रहती है। जिसमे किसी भी आदमी के पसीने की गंध जल्दी उड़ जाती है। रात में सूर्य का प्रकाश नहीं होता है इस लिए इंसान की गंध कुत्ता जड़ी अपने मस्तिष्क में समाहित कर लेता है। इसी कारन से कुत्ता अधिक चौकन्ना हो जाता है। और जरा सी आहत पर भौकने लगता है।

कुत्ता ही जीभ से पानी क्यों पिता ही ? घोडा गाय जैसे जानवर क्यों नहीं पीते 


हम लोग जानते है कि हजारो साल पहले के प्राणियों और आज के प्राणियों में कई अंतर पाए जाते है। पहले सभी प्राणी अपने अपने ढंग से जमीं या पानी पर रहते थे। जिसको जो भोजन मिला वह खा लेते थे। जैसे - तैसे एक दूसरे से रक्षा करके जिन्दा रहते थे। पर धीरे धीरे ये बातें बदलने लगी। 
बदलते बदलते कुछ प्राणी मांसाहारी,सीकरी जानवर और शाकाहारी पालतू जानवर बन गए इन्ही शाकाहारी और मांसाहारी जानवरो मेसे कुत्ता भी  है जो पानी को जीभ से उछलकर पानी पिता है। इसका कारन यह है की ऐसे जानवरो के जबड़े चौड़े और होठ पतले होते है। इस कारन दन्त का उपयोग पकड़ने और चबाने में आसानी से हो जाता है। हम लोग होठो की मदद से बोलने ,पिने अदि का काम करते है। हमारे होठ मोठे और इतने बड़े होते है की हम उन्हें मोड़कर नाली जैस बना लेते है। इसी नाली जैसी स्थिति में हम पानी को अंदर कीच पते है।अतः जिन जानवरो मके होठ पतले और जबड़े चौड़े होते है ,वे हमारी तरह होठो की मदद से पानी नहीं पी सकते है।  

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