आकाश नीला क्यों दिखाई देता है ? बरसात के मौसम में बदल काळा क्यों हो जाते है ?

आकाश नीला क्यों दिखाई देता है

वायुमंडल में मौजूद गैसों के अनु ही वास्तव में आसपास के रंग के लिए जिम्मेदार होते है। सूर्य का प्रकाश सात रंगो का मिश्रण होता है जिसमे लाल और पिले रंगो की तरंगदैर्द्ध सबसे अधिक और नीला  एवं बैगनी रंग की तरंगदैर्द्ध सबसे काम होती है। 
आसमान नीला इसलिए दिखाई देता है क्योकि गैसों के अनु काम तरंगदैर्द्ध वाले रंगो को अधिक छिटका देते है। जुआब वायुमंडल में गैस के अनु की अपेक्षा बड़े कण मौजूद होते है तो वे अधिक तरंगदैर्द्ध वाले रंगो को भी छिटका  देते है  .जिससे नील रंग की तीब्रता काम हो जाती है तब हल्का नीला या दूधिया स्वेत दिखाई देने लगता है.

  बरसात के मौसम में बदल काळा क्यों हो जाते है ?


जब प्रकाश किरणे किसी भी वायु पर गिरती है तो वह वास्तु प्रकाश की कुवह किरणों को परावर्तित कर देती है। तथा सेष को अवशोषित कर लेती है। यदि वास्तु चमकीली है तो किरणे ज्यादापरावर्तित होंगीऔर यदि काली है तो किरणे ज्यादा अवशोषित होंगी । यही नियम  वर्षा के बदलो पर भी लागु होती है। इन बदलो में पानी की असंख्य बुँदे होती है। ये बुँदे सूरज की अधिक से अधिक किरणे अवशोषित कर लेती है। इससे धरती तक बहुत ही काम किरणे पहुंच पति है.तथा बदल काळा हो जाते है। धरती पर किरणे ककम पहुंचने पर चारो और अँधेरा हो जाता है। धुप नहीं निकल पति है। 
कभी कभी बरसाती बदल गहरे काळा होते है। कभी कभी काम गहरे। बदलो का रंग पानी की बूंदो की संख्या पर निर्भर करती है।   

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